बिलासपुर // नेहरू नगर जोन व सरकंडा जोन से अलग होकर मंगला व कोनी अलग जोन बनेगा। मुख्यालय से इसकी सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। अलग जोन बनने का सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। बिजली बंद से लेकर अन्य तकनीकी खामियों पर तत्काल सुधार हो सकेगा। जोन का अलग सेटअप होगा, जहां अधिकारी से लेकर मैदानी अमला तैनात रहेंगे।
इन दोनों क्षेत्रों को अलग जोन बनाने की बेहद आवश्यकता थी। नेहरू नगर जोन में अभी 29 हजार से अधिक उपभोक्ता है। मंगला भी इसी जोन में आता है। यही स्थिति सरकंडा जोन के कोनी क्षेत्र का है। इन दोनों क्षेत्रों में सबसे अधिक बिजली बंद की शिकायतें आती है। वर्तमान जोन का दायरा बड़ा होने के कारण और स्टाफ की कमी के चलते अक्सर सुधार में देरी होती है। जिसके चलते को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वहीं बिजली अमले को अधिकारियों के आक्रोश से गुजरना पड़ता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ही अलग जोन बनाने की मांग उठ रही थी। बिजली वितरण कंपनी ने प्रस्ताव भी भेजा। बिजली कंपनी के चेयरमैन सुबोध सिंह ने पिछले दिनों हुई समीक्षा बैठक में सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। बैठक में उन्होंने सवाल उठाया था कि प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली गुल होने की शिकायतें बिलासपुर से ही क्यों आती हैं। इस दौरान बिजली कंपनी के उच्चाधिकारियों की ओर से कर्मचारियों की कमी, बढ़ते उपभोक्ता और तकनीकी समस्याओं की जानकारी दी। कोनी व मंगला को अलग जोन बनाने की आवश्यकता भी बताई गई। अब जैसे ही मुख्यालय से जोन की स्वीकृति का आदेश आएगा। उसके बाद जोन कार्यालय भवन से लेकर अन्य तैयारियां प्रारंभ कर दी जाएगी।
मंगला जोन में 13 हजार उपभोक्ता
नेहरू नगर जोन के सहायक अभियंता गिरीश श्रीवास्तव ने बताया कि अभी जोन में 29 हजार से अधिक उपभोक्ता हो गए और सात सब स्टेशन है। मंगला अलग जोन होने के बाद यहां 13 हजार उपभोक्ता हो जाएंगे। सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। इससे नेहरू नगर जोन का भार कम होगा, नया सेटअप तैयार होगा और कार्यालयीन व तकनीकी कार्यों के साथ बिजली फाल्ट और उपभोक्ता शिकायतों का निराकरण पहले की तुलना में बेहतर ढंग से हो सकेगा। जल्द ही मुख्यालय से आदेश आने के बाद जोन कार्यालय से लेकर अन्य तैयारियां प्रारंभ होगी।
नए जोन में 40 सदस्यीय टीम
नया जोन बनते ही एक एई, दो जेई, पांच कार्यलयीन कर्मचारियों के अलावा ठेकाकर्मी भी मिलेंगे। लगभग 40 कर्मचारियों की टीम एक जोन में काम करेगी। जाहिर है कि स्टाफ बढ़ने से सुधार कार्य बेहतर ढंग से हो सकेगा। उपभोक्ताओं की शिकायतें भी प्राथमिकता से सुनीं जाएंगी।