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मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने प्रौद्योगिकी-आधारित, प्रभावी एवं जनोन्मुखी न्याय प्रणाली पर दिया जोर

छत्तीसगढ़ :— माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा रायपुर संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में किया गया। सेमिनार में रायपुर संभाग के चार सिविल जिले रायपुर, धमतरी, बलौदा बाजार एवं महासमुंद के 141 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। सेमिनार के मुख्य अतिथि माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं प्रमुख संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर सेमिनार का उद्घाटन किया गया।

इस अवसर पर माननीय श्री न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, माननीय श्री न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, माननीय श्री न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय, माननीय श्री न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल, माननीय श्री न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु, माननीय श्र 2/3 अमितेन्द्र किशोर प्रसाद, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, की भी उपस्थिति रही।

न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश ने निरंतर न्यायिक शिक्षा के महत्व तथा कानून, प्रौद्योगिकी और समाज के बदलते स्वरूप के अनुरूप स्वयं को अद्यतन रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विषय पर संबोधित करते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऑनलाइन लेन-देन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और उन्नत प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ आर्थिक अपराध जटिल होते जा रहे हैं। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने से आपराधिक न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। अतः न्यायिक अधिकारि, नवीन विधिक प्रावधानों की स्पष्ट समझ रखते हुए साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना सुनिश्चित करे।

माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय ने कहा कि व्यवहार वाद में दस्तावेजी साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। निष्पक्ष एवं शीघ्र न्यायनिर्णयन सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेजों का उचित मूल्यांकन एवं उनका सही तरीके से परीक्षण आवश्यक है। दस्तावेजों की ग्राह्यता, प्रमाण, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, स्टाम्पिंग, पंजीयन एवं आपत्तियों से संबंधित मुद्दों का व्यवहार वाद के कार्यवाहियों के परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

माननीय मुख्य न्यायाधीश ने आपराधिक न्याय प्रणाली में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीरो एफआईआर एवं ई-एफआईआर ने अपराधों की त्वरित रिपोर्टिंग को सुगम बनाया है तथा नागरिकों के लिए, अपराध चाहे किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित हुआ हो, आपराधिक न्याय प्रणाली तक पहुंच को आसान बनाया है।

माननीय मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चेक अनादरण के मामले न्यायालयों में लंबित वादों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने ऐसे विवादों के शीघ्र समाधान के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र, विशेष रूप से मध्यस्थता एवं समझौते के महत्व पर जोर दिया। ADR आधारित दृष्टिकोण से न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सकता है, विवादों का शीघ्र समाधान संभव है तथा साथ ही पक्षकारों के व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत संबंधों को बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।

अपने संबोधन के समापन पर माननीय मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सेमिनार में चर्चा किए गए सभी विषयों का एक साझा उद्देश्य है- न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी, प्रौद्योगिकी-अनुकूल, विधिसम्मत एवं जनोन्मुखी बनाना। वर्तमान समय में समाज न्यायपालिका से केवल सही निर्णय देने की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि यह भी अपेक्षा करता है कि न्याय समयबद्ध, पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से प्रदान किया जाए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एवं रजिस्ट्री के अधिकारीगण तथा रायपुर, धमतरी, बलौदा बाजार एवं महासमुंद जिलों के न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया गया। निदेशक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा विषय-परिचय प्रस्तुत किया गया तथा उद्घाटन सत्र का समापन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।

सेमिनार में समसामयिक विधिक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल रहे-

भारतीय न्याय संहिता के लागू होने के पश्चात आर्थिक अपराधों की स्थिति एवं न्यायालयों के समक्ष चुनौतियां;

दीवानी मामलों में दस्तावेजों की ग्राह्यता एवं उपयोग तथा उनके साक्ष्यगत परिणामों के संदर्भ में आपत्ति का अधिकार जीरो

एफआईआर एवं ई-एफआईआर वैधानिक पहलू, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की ग्राह्यता एवं रिकॉर्डिंग में व्यावहारिक चुनौतियां; तथा चेक अनादरण का अपराधीकरण समाप्त करना: ADR आधारित दृष्टिकोण।

राजेन्द्र कश्यप

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