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धान खरीदी केंद्र मस्तूरी में नियुक्त कर्मचारियों तानाशाही का आरोप अव्यवस्था और पुलिस कार्रवाई से किसानों में भारी आक्रोश

बिलासपुर/मस्तूरी :- शासकीय धान खरीदी केंद्र कोसमडीह रोड,मस्तूरी में इस वर्ष धान खरीदी की शुरुआत से ही अव्यवस्था और मनमानी के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि केंद्र में नियुक्त कुछ कर्मचारियों के तानाशाहीपूर्ण रवैये ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं,जिससे धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 14 जनवरी को बड़ी संख्या में किसान तड़के सुबह से ही धान खरीदी केंद्र पहुंच गए थे। कई किसान बिना खाए-पीए,लंबी दूरी तय कर अपनी फसल बेचने आए थे,लेकिन उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। किसानों का आरोप है कि बोरा वितरण का कार्य देखने वाले कर्मचारी मनीलाल कुर्रे प्रतिदिन लगभग 11 बजे बिलासपुर से केंद्र पहुंचते हैं और दोपहर करीब 2 बजे के बाद ही बोरा वितरण शुरू करते हैं। इस दौरान बोरा वितरण में किसी भी प्रकार की पारदर्शिता या क्रम का पालन नहीं किया जाता।

किसानों का कहना है कि पहले आए किसानों को जानबूझकर पीछे कर दिया जाता है,जबकि बाद में आने वालों को प्राथमिकता दी जाती है। इस मनमानी पर जब किसान सवाल उठाते हैं तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है। सुबह से भूखे-प्यासे किसान शाम तक और कई बार रात होने तक केंद्र परिसर में बैठे रहने को मजबूर हो जाते हैं।

आरोप यह भी है कि इस पूरे मामले में संस्था प्रबंधक मनोज रात्रे सहित अन्य कर्मचारियों का मौन समर्थन प्राप्त है,जिसके कारण संबंधित कर्मचारी बेखौफ होकर मनमानी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि केंद्र में जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी न होने से कर्मचारियों का हौसला और बढ़ गया है।

इसी अव्यवस्था और तानाशाही का शिकार बने किसान रिंकु टंडन के साथ हुई घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान रिंकु टंडन के विरुद्ध शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज कर पुलिस कार्रवाई की गई। चालान तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत किया गया और जमानत के बाद वे सीधे धान खरीदी केंद्र पहुंचे। लेकिन लंबे समय से भूखे-प्यासे रहने और मानसिक तनाव के कारण वहां उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई,जिसके बाद उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी में भर्ती कराया गया।

इस घटना के बाद किसानों में भारी रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि वे पहले ही मौसम,लागत और भुगतान की चिंता से परेशान हैं,ऐसे में धान खरीदी केंद्रों पर इस तरह का व्यवहार उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ रहा है किसानों का आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में शासन-प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत कराया,लेकिन अब तक किसी भी दोषी कर्मचारी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कार्रवाई के अभाव में अब क्षेत्र के किसानों में यह भावना घर करने लगी है कि उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान करने वाला कोई नहीं है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि धान खरीदी केंद्र कोसमडीह रोड मस्तूरी की पूरी व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,बोरा वितरण और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए तथा तानाशाही रवैया अपनाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए,ताकि भविष्य में किसानों को इस प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

राजेन्द्र कश्यप

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