कोंडागांव (छत्तीसगढ़): जिले में मजदूरों के हितों की लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले दो प्रमुख संगठन—छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ और राजमिस्त्री एवं मजदूर कल्याण संघ (कोंडागांव)—आमने-सामने आ गए हैं। दोनों संघों ने पुलिस अधीक्षक (SP) के पास एक-दूसरे के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिससे जिले के श्रमिक जगत में हड़कंप मच गया है।
राजमिस्त्री एवं मजदूर कल्याण संघ का आरोप: ‘मजदूरों से हो रही अवैध उगाही’
राजमिस्त्री एवं मजदूर कल्याण संघ ने 12 मई 2026 को शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ के सदस्य सुनील रत्नाकर खुद को श्रम विभाग का अधिकारी बताकर ग्रामीणों से अवैध वसूली कर रहे हैं। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
अवैध शुल्क: खुड़ी, धंवड़ामाल और पीढ़ापाल क्षेत्रों में मजदूर पंजीकरण के नाम पर श्रमिकों से 500-500 रुपये की वसूली की जा रही है, जबकि सरकारी शिविरों में यह प्रक्रिया निःशुल्क है।
प्रलोभन और धोखाधड़ी: श्रमिकों को ‘मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण’ जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर 50,000 रुपये तक की मांग करने और बिना रसीद के पैसे लेने का दावा किया गया है।
फर्जी पहचान: संघ का आरोप है कि ये बाहरी व्यक्ति स्थानीय श्रमिकों को गुमराह कर रहे हैं और स्वयं को श्रम विभाग का प्रतिनिधि बताकर मोबाइल कैंप लगा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ का पलटवार: ‘भ्रष्टाचार उजागर करने से रोकने की साजिश’
इन आरोपों के जवाब में छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ के प्रदेश अध्यक्ष रवि गढ़वाल ने आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और ‘षड्यंत्र’ करार दिया है क्योंकि बीस हजार की योजना में कोई 50,000 की राशि कैसे मांग सकता है। उन्होंने थाना प्रभारी और एसपी को पत्र लिखकर निम्नलिखित तर्क दिए हैं:
धमकी और बाधा: उनका आरोप है कि राजमिस्त्री संघ के पदाधिकारियों ने उनके कार्यकर्ताओं को जिले से खदेड़ने और सदस्यता अभियान रोकने की धमकी दी है।
भ्रष्टाचार का मामला: रवि गढ़वाल का दावा है कि उनका संघ कोंडागांव के श्रम विभाग की योजनाओं में हो रहे ‘भारी भ्रष्टाचार’ के साक्ष्य जुटा रहा है, जिससे डरकर विरोधी संघ झूठी शिकायतें कर रहा है।
छवि धूमिल करने का प्रयास: उन्होंने इसे संघ के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य बताते हुए आरोपी पक्ष के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
साथ ही प्रदेश अध्यक्ष रवि गढ़वाल ने यह भी कहा जो कृत्य विरोधी संघ स्वयं करते है, उसे ही आरोप का आधार बनाया है। जिसका संपूर्ण साक्ष्य हमारे पास सुरक्षित है। जिसे बहुत जल्द उजागर कर दी जाएगी।
जनता और श्रमिकों के बीच असमंजस
जहाँ एक ओर राजमिस्त्री संघ इसे “अवैध उगाही” बता रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पैदा की गई बाधा” कह रहा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूर इस खींचतान के बीच असमंजस में हैं कि कौन सा संगठन वास्तव में उनके हक के लिए काम कर रहा है।
पुलिस की भूमिका: दोनों संघों ने अपने-अपने पक्ष में सबूत और गवाह पेश करने की बात कही है। अब यह पुलिस प्रशासन की जांच पर निर्भर करता है कि सच्चाई क्या है। क्या यह वास्तव में मजदूरों का शोषण है, या फिर दो संगठनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई?